Thursday, December 18, 2008

tu aur hakikat

तू और हकीक़त ------
teri harkato me chhupa ek afsana dekha hai,
tujhe kya dekha hai, sara zamana dekha hai,

tujhe bayan karne ko kya mein likhta,
syahi ka har katra begana dekha hai,

garm hatheliyo se tujhe sard mausam me kya bachata,
tera rua rua us dhoop me mastana dekha hai,

kapdo me gande dhabbe aksar ho jate hai,
us hakikat me tera salika sayana dekha hai,

khuda ne khoob navaja hai in do masum hotho se,
ki nikla har labz inse, mastana dekha hai,

khuda ki kisi galti ka anzaam ho shayad,
ki tere aks me , jurmana dekha hai. -puneet

Wednesday, December 3, 2008

mein bekhabar

kyu tadpta hai dil tere didar ko,
hoke maloom hai dil bekhabar tera,

diye ja rahe hai paigam kyu bahoro ko,
hoke maloom hai gumshuda ghar tera,

kadam khudbkhud rubru ho jate hai teri raho se,
hoke maloom hai door shahar tera,

har dastak pe tere aane ki hai khwahish,
hoke maloom hai nahi idhar ghar tera,

sabb-e-ishq parwana ho chala mein,
hoke maloom hai bedard kahar tera, -puneet

Monday, November 24, 2008

wo aur uska khwab

करीब  ले  जाते  हैं  किसी  सुकून  के  ख्याल  उसके ,
अजब  सी  बेनामी  बेहोशी  दिलाते  हैं   सवाल  उसके ,

भीग  जाता  हूँ  मैं  उस  अजनबी  बारिश  में  ,
याद आते  हैं   जब , जुल्फों  के  कमाल  उसके ,

होता  हैं   जब  कही  हुस्न -ओ -सादगी  का  ज़िक्र ,
खुदबखुद  लबों  पे  चले  आते  हैं   मिसाल  उसके ,

चुपके  से  बातो  ही  बातो  में  जान  लेते  हैं  लोग ,
क्यों  आते  हैं  मेरे  दिल  में  ख्याल  उसके ,

खबर  मिली  नजरों  में  हैं  उसकी  उल्फत ,
दिखे  जब  मेरे  दिल  के  करीब  रखे  रुमाल  उसके , - puneet

Saturday, November 22, 2008

Meri Badnasibi

उल्फतो  में  हमने  अजब  तकदीरी  देखी,
वास्ते  इस  दिल  के  उन  अश्को  की  फकीरी  देखी ,

लब्जो  के  कशीदे  उनके  खूब  थे  अकेले  में ,
ज़माने  भर  में  उन्ही  लब्जो  की  मसखरी  देखी ,

छू लेते  थे  हर  तडपते  अरमान  को  वो ,
गैर  ज़ख्मो  में  उसी  मरहम  की  करीबी  देखी ,

समेट  लाते  थे  हर  गुफ्तगू  की  यादो  को ,
चंद लम्हों  के  गुजरने  पर  सबकी  बेनशी  देखी ,

क्या  कहते  हो  किसी  से , जो  तुम  पे  गुजरी 'चिराग ',
कभी  खुद  की  हरसतो  की  बदनसीबी  देखी .

Friday, November 14, 2008

meri aashiqi

मेरे  नगमो  में  कोई  तो  है ,जो  इस  महफ़िल  में  घुल  गया  है ,
कुछ  तो  है  जो  इस  दिल  से  उस  दिल  तक  गया  है ,

कोशिश  में  है  वो  छुपाने  की  ,चेहरे  पे  उभरी  तमन्नाए ,
मगर  इन   नजरो  से  हर  रंग  धुल  गया  है ,
आज  जज्बातों  को  हरकतों  से  बयां  करते  है , पर  क्यों ,
आखिर  मेरा  लब  उनके  लब  से  सिल  जो  गया   है ,

झलकाते है  वो  दुप्पटे  से , ख्वाबो  से निकालते हैं
पर  बेकार  है  ,ये  शख्स  उस  जिस्म   में  पल  जो   गया  है  -पुनीत 

begining from abt me

वक़्त सा गुजर जाता हूँ ,लोगों को खबर नहीं,
क्या छुपाते हैं वो दिलों में, मैं इतना बेखबर  नहीं  - पुनीत